Add To collaction

लेखनी प्रतियोगिता -24-Feb-2023 भूल का एहसास


                              भूल का  एहसास

     "हेल्लो क्या आप विक्रम जी बोल रहे है ? " भूमिका ने पूछा।

     " जी  मै विक्रम ही बोल रहा हूँ  आप कौन बोल रही हो ? " विक्रम ने पूछा।

   " मै वह लड़की बोल रही हूँ जिसे आप दो दिन बाद देखने आने वाले हो। आपने मेरे विषय में  मेरी पढा़ई व नौकरी के विषय में पता किया होगा। लेकिन आपको किसी ने रंग के विषय में नही बताया होगा। मेरा रंग सांवला है जो यहाँ किसी को पसन्द नही है। शायद आपको भी पसन्द नहीं होगा। इसलिए आप  देखने मत  आना। मै इस रोज रोज की नुमाइश से परेशान होगयी हूँ। आपको भी औरों की तरह एक चाँद जैसे मुखडे़ वाली लड़की चाहिए इसलिए आप मुझे देखने बिल्कुल मत आना। " इतना कहकर भूमिका ने फौन काट दिया।

         भूमिका के दो भाई व उससे छोटी एक बहिन थी ।भूमिका दूसरे नम्बर की थी उससे बडा़ एक भाई था । उसके बडे़ भाई की शादी होगयी थी। अब उसकी शादी की बारी थी । भूमिका का रंग सांवला था।  वह एक बैंक में सरकारी नौकरी पर थी। 

          इतना सब कुछ होने के बाद भी उसको न जाने कितने लड़के वालौ ने नापसंद कर दिया था। उसकी सरकारी नौकरी को देखकर पहले तो सभी तैयार होजाते थे लेकिन उसको देखने के बाद यह कहकर चले जाते कि घर पहुँचकर फैसला बतायेंगे। 

        लेकिन घर जाने के बाद आजतक किसी का फौन नहीं आया क्यौकि सभी को चाँद से मुखडे़ वाली गोरी चिट्टी बहू चाहिए थी लेकिन भूमिका का रंग सांवला था। इसलिए उसे आजतक किसी ने  पसंद नहीं  किया था। उसकी शादी न होने के कारण सभी परिवार वाले परेशान थे क्यौकि उसके कारण छोटे भाई बहिनौ की शादी भी नहीं हो पारही थी।

           भूमिका ने इसलिए अपने मम्मी पापा रातौ को जागते और आपस में बात करते देखा था। वह दोनौ बहुत परेशान रहते थे। माता पिता को तो फिकर होगी ही क्यौकि उनकी जवान बेटी घर में बैठी है। वह खूब सारा दहेज देकर भी बेटी को ससुराल जाती हुई देखना चाहते थे। 

        दो दिन बाद फिरसे यहीं दुहराया जाना था जिसके कारण भूमिका बहुत आहत होचुकी थी ।अब वह यह सब फिरसे दुहराना नहीं चाहती थी। इसीलिए उसने विक्रम से बात करके पुनः अपनी नुमाइश करवाने से मना कर दिया था।

          विक्रम लंच के समय बैंक आया । भूमिका उस समय अपने केविन में लंच कर रही थी। वह भूमिका के पास पहुँचा और बोला,"  आप भूमिका ही है ? मेरा नाम विक्रम  है। मुझे आपसे कुछ बात करनी है।"

      भूमिका को सुबह की हुई पूरी बात याद आगयी। वह गुस्से में किस तरह बोली थी । इसके लिए वह विक्रम से बोली," सारी जी मैं सुबह आपसे फौन पर कुछ तेज आवाज में बोली थी असल में मै अब बहुत आहत होचुकी हूँ। "

          "साॅरी किसलिए? यदि मै आपकी जगह होता तब मेरा भी यहीं हाल होता ?  मुझे तुम्हारा वह बोलना बहुत अच्छा लगा और मै तुमसे मिलने चला आया। क्या मुझे आपने साथ लंच नहीं कराओगी?"

       "नहीं यह सब तो झूंठा होगया आपके लिए और आर्डर कर मंगवा देती हूँ यहीं पास में होटल है।" भूमिका शरमाते हुए बोली।

       "झूंठा  !  नही  मै तो इसी में से खालूंगा अब आपकी मरजी है खाने  का मौका देना है अथवा नहीं?" विक्म बोला।

        भूमिका शरमाने लगी ।विक्रम वही सामने बैठकर लन्च करने लगा और बोला," देखो भूमिका मुझे तुम जैसी ही  जीवनसाथी चाहिए थी जो सब साफ कह सकती हो तुम्हारा सुबह वाला अन्दाज मुझे बहुत अच्छा  लगा। मै  तुम्है देखने नहीअपितु तुम्है खुदको दिखाने आया हूँ। और  मै तुम्हारे माता पिता को किसी कमी का एहसास नही होने दूँगा ।
अब निर्णय तुम्हारे ऊपर है। "

     भूमिका ने शर्म से अपनी नजरे नीचे झुका ली जिसे विक्रम ने हाँ समझकर  उससे कहा," भूमिका अब पापाजी को भेजदेना हमारे घर से कोई नहीं आयेगा। "

      जब भूमिका घर पहुँची तब वहाँ खुशी का माहौल था क्यौकि विक्रम के पापा का फौन आगया था कि हमें भूमिका पसन्द है।आप तारीख निकलवाओ और हम केवल बेटी लेने आयेंगे बहू नही। हमें और कुछ नहीं चाहिए।

      शायद विक्रम व उसके माता पिता को दूसरे लोगौ के द्वारा की गयी भूल का एहसास होगया था इसीलिए वह उस भूल को दुहराना नहीं चाहते थे। 

                               इति श्री

आज की दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना।

नरेश शर्मा " पचौरी "

              

   20
5 Comments

Alka jain

01-Mar-2023 07:44 PM

Nice 👍🏼

Reply

Sushi saxena

26-Feb-2023 10:38 PM

Nice

Reply

बहुत ही सुन्दर

Reply